बलरामपुर/वाड्रफनगर
वाड्रफनगर क्षेत्र में कुछ मेडिकल स्टोर संचालकों पर नियमों को ताक पर रखकर मरीजों का इलाज किए जाने के आरोप सामने आए हैं। शिकायतों के मुताबिक, जिन प्रतिष्ठानों का संचालन दवाइयों की बिक्री के लिए होना चाहिए, वहां कथित तौर पर मरीजों को उपचार भी दिया जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल नियमों की अनदेखी है, बल्कि मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन के साथ गंभीर जोखिम का मामला बन सकता है।
सबसे गंभीर स्थिति प्रेमनगर मोड़ से स्याही गांव के बीच सड़क किनारे देखने को मिलने की बात कही जा रही है, जहां इस्तेमाल किए गए मेडिकल कचरे को कथित तौर पर खुले में फेंका जा रहा है। सड़क किनारे पड़े मेडिकल वेस्ट से राहगीरों, ग्रामीणों और आसपास के लोगों के संक्रमण के संपर्क में आने की आशंका जताई जा रही है। सवाल यह है कि मेडिकल कचरे के निपटारे के लिए निर्धारित व्यवस्था होने के बावजूद इसे खुले में कौन और किसकी निगरानी में फेंक रहा है?
मेडिकल स्टोर में इलाज का खेल?
स्थानीय स्तर पर ऐसे कई मामलों की शिकायतें सामने आने का दावा है, जिनमें मेडिकल स्टोर संचालकों द्वारा उचित चिकित्सा सुविधा और आवश्यक व्यवस्थाओं के बिना मरीजों का उपचार किए जाने की बात कही जा रही है। यदि कोई व्यक्ति आवश्यक चिकित्सकीय योग्यता और अनुमति के बिना मरीजों का उपचार करता है, तो इसकी जांच संबंधित विभागों द्वारा किया जाना आवश्यक है।
प्रतिबंधित दावों के इस्तेमाल पर भी सवाल
मेडिकल उत्पादों के प्रचार-प्रसार में कथित तौर पर प्रतिबंधित अथवा भ्रामक दावों के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। ऐसे दावों का विशेष रूप से बच्चों और महिलाओं के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका को देखते हुए इनके सत्यापन और नियामकीय कार्रवाई की आवश्यकता है।
ड्रग्स कंट्रोलर की निगरानी पर उठे सवाल
मेडिकल स्टोर्स की जांच, लाइसेंस की शर्तों के पालन और दवाइयों के कारोबार की निगरानी की जिम्मेदारी संबंधित नियामकीय व्यवस्था की है। इसके बावजूद यदि क्षेत्र में खुलेआम मेडिकल वेस्ट फेंकने और मेडिकल स्टोर से कथित उपचार की शिकायतें सामने आ रही हैं, तो सवाल उठना स्वाभाविक है कि नियमित निरीक्षण आखिर कितना प्रभावी है या कमीशन की खेल में सब कुछ चल रहा है?
शिकायतों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
स्थानीय स्तर पर शिकायतों और कथित लापरवाही के बावजूद संबंधित मेडिकल स्टोर्स के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने के आरोप हैं। ऐसे में प्रशासन और संबंधित विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग उठ रही है कि क्या इन प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया गया है? क्या संचालकों के पास मरीजों के उपचार के लिए आवश्यक वैधानिक अनुमति और योग्यता है? खुले में फेंके गए मेडिकल वेस्ट की जांच और जिम्मेदारी तय करने के लिए क्या कार्रवाई की गई?
मामले में संबंधित विभाग द्वारा निष्पक्ष जांच कर मेडिकल स्टोर संचालकों के लाइसेंस, मरीजों के उपचार से जुड़े आरोप और मेडिकल वेस्ट के निपटारे की व्यवस्था की जांच किए जाने की जरूरत है। आरोप सही पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना जरूरी होगा।

