आत्मानंद स्कूल में बेटियों की गरिमा पर बड़ा सवाल: छात्र-छात्राओं के शौचालय में नहीं हैं दरवाजे…
सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ रहे विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं का अभाव, छात्राओं की निजता और सुरक्षा पर गंभीर सवाल; डीईओ बोले- स्कूल को पर्याप्त बजट दिया जाता है, प्राचार्य स्वयं करा सकते हैं व्यवस्था..
बलरामपुर(रघुनाथनगर)
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी योजना के तहत संचालित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम विद्यालय, रघुनाथनगर एक बार फिर मूलभूत सुविधाओं की कमी को लेकर सवालों के घेरे में है। गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और आधुनिक सुविधाओं के दावे के बीच विद्यालय में छात्र-छात्राओं के लिए बनाए गए शौचालयों की स्थिति चिंताजनक बताई जा रही है। कई शौचालयों के दरवाजे टूटे हुए हैं, जबकि कुछ स्थानों पर दरवाजे लगे ही नहीं हैं। ऐसे में छात्राओं को शौचालय के उपयोग के दौरान असुविधा और असहज परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है।
विद्यालय में सैकड़ों छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। ऐसे में शौचालय जैसी बुनियादी सुविधा का इस तरह बदहाल होना विद्यालय प्रबंधन और संबंधित विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है। विशेषकर छात्राओं के लिए सुरक्षित और निजी शौचालय की व्यवस्था बेहद जरूरी है। दरवाजे नहीं होने या टूटे होने की स्थिति में छात्राओं की निजता, गरिमा और सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं सामने आ रही हैं।
स्थानीय अभिभावकों और ग्रामीणों का कहना है कि सरकार द्वारा विद्यालयों के रखरखाव और आधारभूत सुविधाओं के लिए बजट उपलब्ध कराया जाता है। इसके बावजूद यदि छात्राओं को शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशानी उठानी पड़ रही है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। अभिभावकों ने विद्यालय में तत्काल शौचालयों की मरम्मत कराकर दरवाजे लगवाने और अन्य आवश्यक सुविधाओं को दुरुस्त करने की मांग की है।
डीईओ बोले- पर्याप्त बजट दिया जाता है, प्राचार्य स्वयं करा सकते हैं व्यवस्था,
मामले को लेकर जिला शिक्षा अधिकारी मनी राम यादव से बात की गई। उन्होंने बताया कि स्वामी आत्मानंद स्कूल के लिए पर्याप्त बजट दिया जाता है और प्राचार्य स्वयं इस बजट के माध्यम से आवश्यक व्यवस्था करा सकते हैं। डीईओ के इस बयान के बाद अब सवाल यह उठ रहा है कि यदि विद्यालय को बजट उपलब्ध कराया जाता है तो शौचालयों के टूटे और बिना दरवाजे वाले होने की समस्या अब तक दूर क्यों नहीं की गई।
डीईओ के अनुसार, विद्यालय प्राचार्य स्तर पर ही इस समस्या का समाधान कराया जा सकता है। ऐसे में अब विद्यालय प्रबंधन पर भी जिम्मेदारी बनती है कि छात्र-छात्राओं की मूलभूत जरूरतों को प्राथमिकता देते हुए शौचालयों की स्थिति को तत्काल सुधारा जाए।
यह मामला केवल शौचालय की मरम्मत या दरवाजा लगाने तक सीमित नहीं है, बल्कि छात्राओं की गरिमा और निजता से सीधे जुड़ा हुआ है। ऐसे में अभिभावकों और स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि संबंधित जिम्मेदार अधिकारी मामले का तत्काल संज्ञान लेकर आवश्यक कार्रवाई करेंगे और विद्यालय में अध्ययनरत छात्राओं को सुरक्षित एवं सम्मानजनक वातावरण उपलब्ध कराया जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि डीईओ के बयान के बाद विद्यालय प्रबंधन कितनी जल्दी शौचालयों की व्यवस्था दुरुस्त करता है और छात्राओं की लंबे समय से चली आ रही इस समस्या का समाधान कब तक होता है।

