तालाब नहीं खोदा, नहर लाइनिंग पर उठे सवाल, अतिक्रमण बरकरार.. ग्रामीण बोले—अधिकारी–ठेकेदार की मिलीभगत से डकारी जा रही सरकारी राशि
चंद्रिका कुशवाहा ,सूरजपुर
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड के ग्राम मानी में सिंचाई विभाग की लगभग 1 करोड़ 63 लाख रुपये की लागत से स्वीकृत तालाब जीर्णोद्धार एवं नहर लाइनिंग योजना गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि करोड़ों रुपये की इस महत्वाकांक्षी योजना में विभागीय अधिकारियों और ठेकेदार की कथित मिलीभगत से निर्माण कार्य में खुलेआम अनियमितताएं की जा रही हैं। आरोप है कि निर्धारित तकनीकी मापदंडों की अनदेखी कर घटिया निर्माण कराया जा रहा है, जबकि अधूरे कार्य को भी कागजों में पूर्ण दिखाने की तैयारी चल रही है। इससे पूरे क्षेत्र में आक्रोश व्याप्त है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस योजना से वर्षों तक किसानों को सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद थी, वही योजना अब भ्रष्टाचार के आरोपों के कारण चर्चा का विषय बन गई है। उनका आरोप है कि कई महीने पहले शुरू हुआ कार्य आज तक पूरा नहीं हुआ, लेकिन बरसात शुरू होते ही अधूरे निर्माण को पूर्ण दर्शाने की कोशिश की जा रही है, ताकि पानी भर जाने के बाद वास्तविक स्थिति छिपाई जा सके।

सबसे गंभीर आरोप तालाब के गहरीकरण को लेकर लगाए गए हैं। योजना के अनुसार तालाब का वैज्ञानिक तरीके से गहरीकरण होना था, जिससे उसकी जलधारण क्षमता बढ़ सके, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर ऐसा कोई कार्य दिखाई नहीं देता। पुराने कीचड़ तक को पूरी तरह नहीं निकाला गया, जबकि तालाब की भूमि पर वर्षों से किए गए अतिक्रमण भी जस के तस बने हुए हैं। आरोप है कि विभाग ने अतिक्रमण हटाने की दिशा में कोई कार्रवाई नहीं की, जिससे तालाब का रकबा लगातार सिमटता जा रहा है।
इसी प्रकार नहर लाइनिंग के कार्य पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य तय गुणवत्ता और मापदंड के अनुरूप नहीं किया जा रहा। कई स्थानों पर लाइनिंग में दरारें दिखाई देने लगी हैं। लोगों का कहना है कि यदि निर्माण की यही स्थिति रही तो पहली ही बरसात में नहर क्षतिग्रस्त हो सकती है और करोड़ों रुपये की योजना बेअसर साबित होगी।
ग्रामीणों ने यह भी आशंका जताई है कि कार्य पूरी तरह समाप्त हुए बिना ही भुगतान की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है। उनका कहना है कि यदि अधूरे और गुणवत्ताहीन कार्य का भुगतान कर दिया गया तो इससे शासन को आर्थिक नुकसान होगा और दोषियों को संरक्षण मिलने का संदेश जाएगा।

गांव के किसानों का कहना है कि तालाब का गहरीकरण नहीं होने से खरीफ और रबी दोनों फसलों के लिए सिंचाई संकट बना रहेगा। उनका कहना है कि योजना का उद्देश्य किसानों को पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन यदि निर्माण कार्य इसी तरह चलता रहा तो करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी किसानों को कोई वास्तविक लाभ नहीं मिलेगा।
ग्रामीणों के अनुसार, उन्होंने कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित किया, लेकिन स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। ग्राम पंचायत के सरपंच प्रतिनिधि ने बताया कि पंचायत की ओर से सिंचाई विभाग और जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी को लिखित शिकायत भेजी गई है। शिकायत में तालाब की शासकीय भूमि से अतिक्रमण हटाने, स्वतंत्र तकनीकी टीम से निर्माण कार्य की जांच कराने, कार्य की माप-जोख कराने तथा निर्धारित मापदंडों के अनुसार कार्य पूरा होने तक भुगतान पर रोक लगाने की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर मामले की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं हुई और दोषियों पर कार्रवाई नहीं की गई, तो वे कलेक्टर कार्यालय का घेराव कर आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि अब वे करोड़ों रुपये की योजनाओं में कथित अनियमितताओं को चुपचाप सहन नहीं करेंगे।
जानकारी के अनुसार, इस सिंचाई योजना के तहत ग्राम मानी में तालाब का जीर्णोद्धार तथा लगभग दो किलोमीटर नहर की लाइनिंग का कार्य कराया जाना है। योजना का उद्देश्य सिंचाई क्षमता बढ़ाना और किसानों को स्थायी जल उपलब्ध कराना है, लेकिन वर्तमान स्थिति को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

