वाड्रफनगर वन विभाग संदिग्ध टीपी के साथ लकड़ी से भरा ट्रक पकड़ा, एक ही परमिशन पर सैकड़ों गाड़ियों के संचालन की आशंका…
चन्द्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
बलरामपुर जिले के अंतर्राज्यीय वनोपज जांच नाका धनवार पर वन विभाग ने नीलगिरि लकड़ी से लदे एक संदिग्ध ट्रक को रोककर बड़ी कार्रवाई की है। प्रारंभिक जांच में ट्रक चालक द्वारा प्रस्तुत ट्रांजिट पास (टीपी) और अन्य दस्तावेज संदिग्ध पाए गए, जिसके बाद पूरे मामले को जांच के दायरे में ले लिया गया है। इस कार्रवाई के बाद लकड़ी कारोबारियों में हड़कंप मच गया है और अब आशंका जताई जा रही है कि कहीं एक ही टीपी और एक ही अनुमति पत्र का उपयोग कर बड़ी संख्या में लकड़ी से लदे वाहनों का परिवहन तो नहीं किया जा रहा था।सूत्रों के अनुसार जांच के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों में ओवरराइटिंग और अन्य अनियमितताओं के संकेत मिले हैं। विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि दस्तावेज वास्तविक हैं या उनमें फेरबदल कर अवैध परिवहन को वैध दिखाने का प्रयास किया गया। यदि जांच में यह आशंका सही साबित होती है तो यह प्रदेश में लकड़ी तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का खुलासा हो सकता है।

मामले में यह आरोप भी सामने आ रहे हैं कि सूरजपुर जिले के कुछ वन एवं राजस्व अधिकारियों की कथित मिलीभगत अथवा लापरवाही के कारण इस प्रकार का अवैध कारोबार लंबे समय से संचालित हो रहा है। बताया जा रहा है कि एक ही आदेश और एक ही ट्रांजिट पास में ओवरराइटिंग कर कई वाहनों से लकड़ी का परिवहन कराया जा रहा था। हालांकि इन आरोपों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और जांच जारी है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि छत्तीसगढ़ के बाहर से आए कुछ कारोबारी मोटी रकम के लेन-देन के जरिए अवैध लकड़ी कारोबार को संचालित कर रहे हैं। यदि जांच में दस्तावेजों की हेराफेरी और नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है तो यह मामला केवल अवैध परिवहन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसमें कई अन्य पहलुओं की भी जांच हो सकती है।

इस संबंध में एसडीओ संस्कृति बारले ने कहा, “यह मामला गंभीर है। विभाग द्वारा टीम और स्टाफ को वाहन जांच, ट्रांजिट पास (टीपी) सत्यापन तथा सभी आवश्यक प्रक्रियाओं का विधिवत प्रशिक्षण दिया गया है। इसके बावजूद यदि इस तरह की चूक हुई है तो इसकी जांच कराई जाएगी। जांच में यदि धोखाधड़ी या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी तथा नियमानुसार वाहनों की राजसात (जब्ती) की कार्रवाई भी की जाएगी।”फिलहाल वन विभाग दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामला केवल संदिग्ध दस्तावेजों का है या फिर इसके पीछे अवैध लकड़ी तस्करी का कोई बड़ा संगठित नेटवर्क सक्रिय है। पूरे मामले पर अब वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों और प्रशासन की नजर बनी हुई है।”मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए डीएफओ डी.पी. साहू से मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।
(नोट: इस समाचार में अवैध परिवहन, फर्जी दस्तावेज और संगठित नेटवर्क से जुड़े सभी बिंदु स्थानीय सूत्रों एवं प्रारंभिक जानकारी पर आधारित हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि वन विभाग की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगी।)

