.छत्तीसगढ़ के धमतरी में शिक्षा व्यवस्था से जुड़ा एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने जिम्मेदार अधिकारियों के व्यवहार पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि बच्चों के लिए शिक्षक की मांग लेकर पहुंचे पालकों की फरियाद सुनने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। इतना ही नहीं, जब पूरे मामले को कैमरे में कैद करने मीडिया पहुंची तो जिला शिक्षा अधिकारी का रवैया भी सवालों के घेरे में आ गया। मामला कुरूद विकासखंड के शासकीय माध्यमिक शाला दर्रा का है। यहां अंग्रेजी विषय के एकमात्र शिक्षक का तबादला किए जाने के बाद स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने वाला कोई दूसरा शिक्षक नहीं था। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई और उनके भविष्य को लेकर पालकों की चिंता बढ़ गई। इसी मांग को लेकर सोमवार को बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं और उनके पालक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पहुंचे। जहां हाथ जोड़कर अधिकारियों से गुहार लगाई गई कि स्कूल में अंग्रेजी विषय के शिक्षक की व्यवस्था की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो। लेकिन पालकों का आरोप है कि उनकी समस्या सुनने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया। जिला शिक्षा अधिकारी मधुलिका तिवारी पर आरोप है कि उन्होंने पालकों से कहा कि वे बच्चों को जबरदस्ती यहां लेकर आए हैं। मामला यहीं नहीं रुका। जब इस पूरे घटनाक्रम की कवरेज के लिए मीडिया मौके पर पहुंची तो DEO ने मीडिया पर ही सवाल खड़े कर दिए। अधिकारी ने कथित तौर पर कहा कि इन पालकों को मीडिया वाले ही यहां लेकर आए हैं। मीडिया के कैमरे के सामने अधिकारी द्वारा यह कहा गया कि जो वह कहें, वही खबर में चलाया जाए और मीडिया अपने हिसाब से खबर न बनाए। यहां तक कि बनाए गए वीडियो को डिलीट करने के लिए भी कहा गया। अब सवाल यह है कि अधिकारी का इस तरीके का व्यवहार और उदासीनता पर आगे क्या एक्शन होता है…? लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका जनता की आवाज को सामने लाने की है। ऐसे में एक जिला स्तरीय शिक्षा अधिकारी के कथित व्यवहार ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद DEO की ओर से यह सफाई दी गई कि दर्रा स्कूल से जिस शिक्षक का तबादला किया गया था, उसके खिलाफ LIC एजेंट के तौर पर काम करने की शिकायत मिली थी। इसी शिकायत के आधार पर कार्रवाई की गई थी। हालांकि, बाद में अधिकारी ने स्कूल में शिक्षक की कमी को देखते हुए संबंधित शिक्षक को वापस दर्रा स्कूल भेजने की बात कही है। यानी बच्चों को शिक्षक मिलने की उम्मीद जरूर जगी है, लेकिन इस पूरे मामले में बड़ा सवाल अब भी अधिकारी के कथित व्यवहार को लेकर है। पालकों और छात्रों का आरोप है कि वे अपने बच्चों के भविष्य की चिंता लेकर अधिकारी के पास पहुंचे थे, लेकिन उन्हें समाधान की जगह कथित तौर पर अपमान और धमकी का सामना करना पड़ा। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम में मीडिया के साथ कथित बदसलूकी और वीडियो डिलीट करने के निर्देश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि इस मामले में शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन क्या संज्ञान लेता है?
क्या बच्चों की समस्या के साथ-साथ अधिकारी के कथित व्यवहार की भी जांच होगी? और क्या जिम्मेदार अधिकारी पर कोई कार्रवाई होगी? क्योंकि सवाल सिर्फ एक स्कूल में शिक्षक की कमी का नहीं है…सवाल उस व्यवस्था का है, जहां अपने बच्चों के भविष्य की फरियाद लेकर पहुंचे पालकों को सम्मान मिलेगा या उन्हें सवाल पूछने की भी इजाजत नहीं होगी।

