बलरामपुर।
रक्षाबंधन के पावन अवसर पर बलरामपुर कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी ने मानवीय संवेदनाओं की मिसाल पेश करते हुए वृद्धाश्रम पहुंचकर वहां निवासरत वृद्धजनों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। कलेक्टर ने वृद्धजनों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधा और उन्हें मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। इस दौरान उन्होंने बुजुर्गों से आत्मीयता के साथ बातचीत की और उनका हाल-चाल जाना।
वृद्धाश्रम पहुंचने पर कलेक्टर ने वहां रहने वाले बुजुर्गों से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात की। उन्होंने उनके स्वास्थ्य, दैनिक जीवन और आश्रम में उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। कलेक्टर ने वृद्धजनों की बातें गंभीरता से सुनीं और उनकी आवश्यकताओं को समझने का प्रयास किया। बुजुर्गों ने भी कलेक्टर के इस आत्मीय व्यवहार पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए उन्हें आशीर्वाद दिया।


बुजुर्गों की कलाई पर बांधा रक्षा सूत्र
रक्षाबंधन के अवसर पर कलेक्टर ने वृद्धजनों की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके प्रति सम्मान और अपनत्व की भावना व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने बुजुर्गों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई। इस आत्मीय पल के दौरान वृद्धाश्रम का वातावरण भावुक और खुशनुमा नजर आया। लंबे समय से अपनों से दूर रह रहे बुजुर्गों के बीच प्रशासन के मुखिया का इस तरह पहुंचना उनके लिए विशेष अनुभव रहा।


प्रशासनिक दायित्व के साथ मानवीय संवेदनाओं की मिसाल
कलेक्टर का वृद्धाश्रम पहुंचना केवल एक औपचारिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने बुजुर्गों के साथ समय बिताकर उन्हें परिवार जैसा अपनत्व देने का प्रयास किया। उन्होंने वृद्धजनों से उनकी दिनचर्या और जरूरतों को लेकर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने यह संदेश दिया कि समाज के बुजुर्गों का सम्मान करना और उन्हें भावनात्मक सहयोग देना सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।


अपनों से दूर बुजुर्गों के बीच बांटी खुशियां
रक्षाबंधन आमतौर पर परिवार के सदस्यों के साथ मनाया जाने वाला पर्व है। ऐसे में अपनों से दूर वृद्धाश्रम में रह रहे बुजुर्गों के बीच कलेक्टर का पहुंचना उनके लिए भावनात्मक रूप से महत्वपूर्ण रहा। कलेक्टर ने बुजुर्गों के साथ कुछ समय बिताकर पर्व की खुशियां साझा कीं। इस दौरान वृद्धजनों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी।
आत्मीय पहल की जिलेभर में हो रही सराहना
कलेक्टर संजय चंदन त्रिपाठी की इस पहल की जिले में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की ऐसी संवेदनशील पहल समाज के कमजोर और अकेले वर्गों में विश्वास पैदा करती है। रक्षाबंधन के अवसर पर वृद्धाश्रम पहुंचकर बुजुर्गों के साथ पर्व मनाना प्रशासन की संवेदनशील कार्यशैली और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है।रक्षाबंधन के इस अवसर पर कलेक्टर ने वृद्धजनों के बीच पहुंचकर न केवल रक्षा सूत्र बांधा, बल्कि उन्हें यह एहसास भी कराया कि वे समाज से अलग नहीं हैं। उनके साथ खड़ा होने और उनकी खुशियों में सहभागी बनने का यह प्रयास पर्व की मूल भावना—स्नेह, सम्मान, अपनत्व और रिश्तों की मजबूती—को सार्थक करता नजर आया।

