Goddess Parvati’ नई दिल्ली। हिंदू धर्म में मां दुर्गा को दिव्य शक्ति और ऊर्जा की सर्वोच्च देवी के रूप में पूजा जाता है। उन्हें जगत जननी, आदिशक्ति और ब्रह्मांड की माता माना जाता है। मां दुर्गा का स्वरूप केवल शक्ति और साहस का प्रतीक नहीं है, बल्कि उनकी सवारी सिंह भी वीरता, निर्भयता और शक्ति का प्रतीक मानी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस सिंह को मां दुर्गा की सवारी के रूप में पूजा जाता है, उससे जुड़ी एक रोचक पौराणिक कथा भी प्रचलित है?
देवी पार्वती और शेर से जुड़ी कथा
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, एक बार देवी पार्वती घोर तपस्या कर रही थीं। इसी दौरान एक भूखा और शक्तिशाली शेर वहां पहुंचा। शेर की नजर देवी पार्वती पर पड़ी और उसने उन्हें अपना भोजन बनाने का विचार किया। हालांकि देवी को देखते ही उसके भीतर एक अलग तरह का भाव उत्पन्न हुआ और वह वहीं रुक गया।
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कहा जाता है कि शेर देवी के पास बैठकर उनके तपस्या पूरी करने का इंतजार करने लगा। देवी पार्वती अपनी साधना में इतनी लीन थीं कि उन्हें शेर की मौजूदगी का अहसास भी नहीं हुआ।
लंबे समय तक करता रहा इंतजार
मान्यता है कि शेर काफी लंबे समय तक देवी के पास बैठा रहा। शुरुआत में उसका उद्देश्य देवी को अपना निवाला बनाना था, लेकिन समय बीतने के साथ उसके मन में देवी के प्रति श्रद्धा और समर्पण का भाव उत्पन्न हो गया।
जब देवी पार्वती की तपस्या पूरी हुई और उन्होंने अपनी आंखें खोलीं, तो उन्होंने शेर को अपने सामने देखा। देवी ने उसके भाव को समझ लिया और उसकी हिंसक प्रवृत्ति को समाप्त कर उसे अपने संरक्षण में ले लिया।
कैसे बना मां दुर्गा का वाहन?
पौराणिक कथाओं में आगे बताया जाता है कि देवी पार्वती ने शेर को अपना वाहन बनने का वरदान दिया। इसके बाद वही सिंह देवी के शक्ति स्वरूप के साथ जुड़ गया। बाद में जब देवी ने महिषासुर जैसे दैत्यों के विरुद्ध युद्ध किया, तो सिंह उनके साथ रहा।
इसी कारण मां दुर्गा की प्रतिमाओं और चित्रों में उन्हें सिंह पर सवार दिखाया जाता है। सिंह देवी की शक्ति, साहस और विजय का प्रतीक माना जाता है।

